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ओ ओ ओ ओ ओ ओ अं अं अं अं अं हम चले वतन की ओर डाल के प्रेम की डोर हम चले वतन की ओर डाल के प्रेम की डोर बाबा खींच रहा है आज सहज ही अपनी ओर हम चले वतन की ओर मन तो उड़ता ही जाए बिन पूछे बिन बतलाए मन तो उड़ता ही जाए बिन पूछे बिन बतलाए हम से छुपके हम से दूर बैठा उनसे मिलन मनाए अकेला उनसे बाते करता होता है आनंदविभोर बाबा खींच रहा है आज सहज ही अपनी ओर हम चले वतन की ओर डाल के प्रेम की डोर बाबा खींच रहा है आज सहज ही अपनी ओर हम चले वतन की ओर तबसे मनका नहीं ठिकाना जबसे उनको हमने जाना तबसे मन का नहीं ठिकाना जबसे उनको हमने जाना खो गया है बाबा में पा लिया उनसे जो पाना शांति के सागर में डूबा सुनता नहीं जग का शोर बाबा खींच रहा है आज सहज ही अपनी ओर हम चले वतन की ओर डाल के प्रेम की डोर बाबा खींच रहा है आज सहज ही अपनी ओर हम चले वतन की ओर डाल के प्रेम की डोर बाबा खींच रहा है आज सहज ही अपनी ओर हम चले वतन की ओर डाल के प्रेम की डोर बाबा खींच रहा है आज सहज ही अपनी ओर हम चले वतन की ओर डाल के प्रेम की डोर बाबा खींच रहा है आज सहज ही अपनी ओर —-------------------------------------------