"दादीजी ने अपने सम्पूर्ण जीवन में अनेक कीर्तिमान स्थापन किए, चाहे वो प्रशासन हो या पालना उनके है एक करम आदर्श बन गए
उनके अदम्य उत्साह, वात्सल्य पूर्ण पालना के कारण उस ऊंचे विश्व के लिए प्रेरणा स्त्रोत वा प्रकाश स्तंभ को देखने से ही मानव मात्र को जिनकी राह वा समस्याओं का समाधान मिल जाता था
उनके अदभुत व्यक्तित्व के कारण ही आज भी हर एक ब्रह्माकुमार ब्रह्माकुमारी भाई बहनों में उनके व्यक्तित्व की छबि देखने को मिलती है
भला उस मां के उपकारों को कैसे भुला जा सकता है जिसने खुद जागकर दूसरों को चैन की नींद सुलाया हो सदा ममता के झूले में झूलाया हो
उस शाश्वत प्रकाश स्तंभ ने ऐसे असंख्य दीपक जगा दिए जो पूरे विश्व को रोशन करने के लिए वा स्वर्णिम प्रभा लाने के लिए तत्पर है जिनकी आभा में उस मां का ही प्रकाश या ओजस्विता दिखाई देती है
हर एक के मुख से यही आवाज आता है यही आवाज आता है
हमें कहानी दादियो की देते हमको निशानिया
हमें कहानी दादियो की देते हमको निशानिया
आज बने है जो भी हम तो इन्हिकी की मेहरबानियां। इन्हिकी की मेहरबानियां
सदा हमारी सेवा में दीदी का सर्व समर्पण है
दैवी गुणोको दर्शाता दादियों का दिल तो दर्पण है
स्नेह प्यार में पाल के अपने सुख की दे कुर्बानियां
आज बने है जो भी हम तो इन्हिकी मेहरबानियां इन्हिकी मेहरबानियां
ज्ञान की लोरी सुना सुना के निर्बल को भी पाला है
बड़े प्रेम से सुख के हिलोले दे रख हमें संभाला है
बहुत शुक्रियां बहुत शुक्रिया हमपे पड़ी परछाइयां
आज बने है जो भी हम तो इन्हिकी मेहरबानियां इन्हिकी मेहरबानियां
इन्हे देख जो हमे खुशी है हमें देख हो इनको
यही स्नेह का सिला देकर निश्चिंत करे हम इनको
एक बने हम नेक बने वो बीती कहानियां
आज बने है जो भी हम तो इन्हिकी मेहरबानियां इन्हिकी मेहरबानियां
इन्हिकी मेहरबानियां"
