

हम है पूर्वज आदि रचना हम है पूर्वज आदि रचना बाबा से ही हमने ही जाना अपने बोल सदा युक्तियुक्त हो स्वयं भी सदा व्यर्थ से मुक्त हो सतवचन ही मुख से कहना हम है पूर्वज आदि रचना बाबा से ही हमने ही जाना अपने बोल सदा युक्तियुक्त हो स्वयं भी सदा व्यर्थ से मुक्त हो सतवचन ही मुख से कहना हम है पूर्वज आदि रचना संगम युग का समय ही अनमोल है भविष्य राज्य का यही आधार संकल्प स्वप्न में पवित्रता हो बाबा के दिल पर हो अधिकार सर्व के सहयोगी सब के हो प्यारी बाबा के दिल पसंद बन जाना सब के सम्मान से तख्तनशीन का संगम पर सौभाग्य पाना हम है पूर्वज आदि रचना बाबा से ही हमने ही जाना हम है पूर्वज आदि रचना सहनशील बन सहन करना बाबा की है आज्ञा मन शान की इच्छा ना हो कुछ न मांगना है ये प्रतिज्ञा विधिवत हो अपना योगी जीवन पूजन लायक हो कर्म अपना माया के भी रूप अनेक है उन सबसे बचके रहना हम है पूर्वज आदि रचना बाबा से ही हमने ही जाना अपने बोल सदा युक्तियुक्त हो स्वयं भी सदा व्यर्थ से मुक्त हो सतवचन ही मुख से कहना हम है पूर्वज आदि रचना