

हमे अपने मन मंदिर को सदाही स्वच्छ रखना है हमे अपने मन मंदिर को सदाही स्वच्छ रखना है सदा शुभ भावना सदा शुभ भावना की ज्योति को इसमें जलाना है हमे अपने बुद्धि कलश को सदाही साफ रखना है सदा शुभ कामना के मोती सबको दिल से देना है हमे अपने मन मंदिर को सदाही स्वच्छ रखना है अपकारी पर भी हमको उपकार ही सदा करतेही रहना अपने मनके दामन से व्यर्थके दाग मिटाना अपना वर्सा है अपना वर्सा है सर्व शक्तिया इन्हें कार्य में लाना ब्रम्हा बाबा के समान हमे कर्तव्य है करना निराकारी स्थिति में शिव बाबा के समान है बनना बनकर के फरिश्ता हमको वतन की ओर चलना है हमे अपने मन मंदिर को सदाही स्वच्छ रखना है अमृतवेले उठते ही यही संकल्प हम करे ऊंची स्थिति पे रहनेवाले फरिश्ते हम जमीपे है उतरे प्रभु संदेश देने का श्रेष्ठ कर्म करना है फरिश्ता भव के वरदानी यही स्वमान लेना है फरिश्ता स्वरूप से सबको फरिश्तारूप बनाना है देह का भान त्यजकर हमको आत्म स्वरूप होना है हमे अपने मन मंदिर को सदाही स्वच्छ रखना है सदा शुभ भावना सदा शुभ भावना की ज्योति को इसमें जलाना है हमे अपने बुद्धि कलश को सदाही साफ रखना है सदा शुभ कामना के मोती सबको दिल से देना है हमे अपने मन मंदिर को सदाही स्वच्छ रखना है