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"इस तन के दीप में एक ज्योति जगमगाए इस तन के दीप में एक ज्योति जगमगाए जैसे की सीप में जैसे की सीप में कोई मोती मुस्कुराएं इस तन के दीप में एक ज्योति जगमगाए बजते है तार तख्त के मैं आत्मा हुं लगते है ध्यान मन के जब साधता है साधक बन कर गुफा में बैठा एक योगी प्रभु को ध्याए इस तन के दीप में एक ज्योति जगमगाए चेतन तू एक रथ है और आत्मा रथी है बाबा है मेरा साथी वो ही तो सारथी है मेरे साथ वो सदा तो मन क्यूं ना गुनगुनाए इस तन के दीप में एक ज्योति जगमगाए अंबर के पार मेरा एक प्यारा सा नगर है वो ज्योतियों की दुनियां परमात्मा का घर है अब दार बनके बाबा हमारे उद्धार करने आए इस तन के दीप में एक ज्योति जगमगाए चले वतन पहनकर पल भर को मेरा पाना कर्तव्य पूरा करके वापस है लौट जाना श्रीमत के पथ पे चलते चलते बाहों में तेरी समाए इस तन के दीप में एक ज्योति जगमगाए जैसे की सीप में जैसे की सीप में कोई मोती मुस्कुराएं इस तन के दीप में एक ज्योति जगमगाए"