

बीत चली है रात अंधेरी सुख की वो आई सुबह सुख की वो आई सुबह जाग मेरे मन जाग जरा जाग मेरे मन तू जाग जरा जाग मेरे मन जाग जरा जाग मेरे मन तू जाग जरा जान गंवाती फसकर बचने आकर प्रलोभन में जैसे जाल में क्यों इन झूठे सुखों के तू भी फंसा है ऐसे इनमें धोखा और छलावा छोड़ दे तू जरा छोड़ दे तू जरा जाग मेरे मन जाग जरा जाग मेरे मन जाग जरा जाग मेरे मन जाग जरा जाग मेरे मन तू जाग जरा मै आत्मा काया विनाशी मै आत्मा काया विनाशी पंचेंद्रियों का मै राजा परमात्मा से हर आत्मा का माता पिता का है नाता दीप न जाए हर पल सफल कर घड़ियां है वाती जरा घड़ियां है वाती जरा जाग मेरे मन जाग जरा जाग मेरे मन तू जाग जरा जाग मेरे मन जाग जरा जाग मेरे मन तू जाग जरा जाग मेरे मन जाग जरा जाग मेरे मन जाग जरा जाग मेरे मन जाग जरा जाग मेरे मन तू जाग जरा