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(कहते है किसी झूठ को बार बार बोला जाय तो लोग उसे सच मान लेते है पर क्यों भूल जाते है की हर चमकती चीज सोना नहीं होती झूठी माया झुठी काया को सच मानकर आज मनुष्य अज्ञानकी गहरी नींद में सोया पड़ा है दुनिया की चमक दमक ने सच को पहचानने वाली अंतर्मन की आंखो पर पडदे डाल दिए है और हर मन पर छाया है घोर अंधकार पर इस रात के बाद स्वर्णिम प्रभात भी अवश्य होनी है जाग रे इंसान…. जाग रे इंसान तू क्यों नींद में खोया नव प्रभात द्वारे खड़ा करले पहचान जाग रे इंसान जाग रे इंसान ढूंढ रहा जिसको वह है तुझे बुलाते चरण रचित याद तुझे वो स्वर्ग है दिलाते कौन तू कहासे आया आज है तू जो जाग रे इंसान…. जाग रे इंसान संबंध तो बाबा के सारे एक ही जन्म के आत्मा परमात्माका संबंध तो सदा के लिए है कौन तुझे क्या देगा आज ले तू जो जाग रे इंसान…. जाग रे इंसान तू क्यों नींद में खोया नव प्रभात द्वारे खड़ा करले पहचान जाग रे इंसान जाग रे इंसान जाग रे इंसान जाग रे इंसान —-------------------------------------