

"जब से मेरे मन को मिला बाबा तू मित रे ओठो पे हर पल है ये खुशियों के गीत रे जब से मेरे मन को मिला बाबा तू मित रे ओठो पे हर पल है ये खुशियों के गीत रे अब तो लगी ऐसी लगन भूले ये न भुलाए आंखों में तुम ही तुम बाबा हो समाए अब तो लगी ऐसी लगन भूले ये न भुलाए आंखों में तुम ही तुम बाबा हो समाए प्राणों में पल रही है तेरी ही प्रीत रे जब से मेरे मन को मिला बाबा तू मित रे ओठो पे हर पल है ये खुशियों के गीत रे दिल में कोई चाह नहीं गम की न कोई आह जिसकी न हो हमको खबर ऐसी न कोई राह दिल में कोई चाह नहीं गम की न कोई आह जिसकी न हो हमे खबर ऐसी न कोई राह ज्ञान और योग का है यही नवनित रे जब से मेरे मन को मिला बाबा तू मित रे ओठो पे हर पल है ये खुशियों के गीत रे वाह रे मैं वाह वाह मेरी ये तकदिर है वाह बाबा वाह हमे दी तूने ये तदबीर है वाह रे मैं वाह वाह मेरी ये तकदिर है वाह बाबा वाह हमे दी तूने ये तदबीर है बाबा ही बाबा का गूंजे संगीत रे जब से मेरे मन को मिला बाबा तू मित रे ओठो पे हर पल है ये खुशियों के गीत रे