"जब से मिले हो, बाबा हमको विहँस रहा जीवन उपवन दिव्य गुणों की कस्तूरी से, महक रहा है मन मधुबन
धरती-सा धीरज आया, खुले गगन-सा हुए उदार
सागर-सी गहराई मन में, सबके लिए है प्यार ही प्यार
हीरे बने पुकार हृदय के, मोती बन गये है असुवन
जब से मिले हो, बाबा हमको विहँस रहा जीवन उपवन
कर्म बने हैं सुखदायी, वाणी से बहे अमृतधारा
कमल समान बने जग में, जीवन कितना न्यारा प्यारा
शुभ चिन्तन सागर मंथन से रत्न मिले हैं मनभावन
जब से मिले हो, बाबा हमको विहँस रहा जीवन उपवन
समय, श्वास, संकल्प सभी में, शुभ- भावना समायी है
तन-मन सेवा में कर अर्पण, प्रभु पालना पायी है
पावन जीवन आंगन में अब, बरस रहा है सुख सावन
जब से मिले हो, बाबा हमको विहँस रहा जीवन उपवन"
