

जब तुमसे मन जुड जाता है आनंद अलौकिक पाता है जब तुमसे मन जुड जाता है आनंद अलौकिक पाता है तुमसे मिलने की चाहत में मन मैलौ तक उड जाता है मन मैलो तक उड जाता है जब तुमसे मन जुड जाता है आनंद अलौकिक पाता है सांसों की तारों में हर पल बजता तेरा गीत निरंतर सांसों की तारों में हर पल बजता तेरा गीत निरंतर मेरे अनहद नाद की धुन अब गूंजे हर पल मन के भीतर मेरे अनहद नाद की धुन अब गूंजे हर पल मन के भीतर मन को पंख दिए ए कैसे रोके ना रुक पाता है इस मन को प॔ख दीए ए कैसे रोके ना रख पाता है तुमसे मिलने की चाहत में मन मैलौ तक उड जाता है मन मैलो तक उड जाता है जब तुमसे मन जुड जाता है आनंद अलौकिक पाता है जब तुमसे मन जुड जाता है आनंद अलौकिक पाता है मन की मृग कृष्णा भटक गई थी कांटो के इस जंगल में मैं अनजाना उलझ गया था मोह माया के दलदल में मोह माया के दलदल में मन के शोर सब थम से गए है तुज झरने की कल कल में मन के शोर सब थम से गए है तुज झरने की कल कल में सारे प्रश्नों का हल पाया तेरे एक ही उत्तर में तेरे एक ही उत्तर में जब तुमसे मन जुड जाता है मन खुशियों से भर जाता है जब तुमसे मन जुड़ जाता है मन मैलो तक उड़ जाता है आनंद अलौकिक पाता है मन खुशियों से भर जाता है