

धरती का पावन चमन, विश्व का एक और मधुबन। साकार में मम्मा का वतन, यह है पूना का जगदम्बा भवन। मन की गलियों में गूँजे मधुर तराना, जगदम्बा भवन है प्रेम का खज़ाना । यही भवन है मम्मा की यादों का, साकार यादगार ये माँ के प्यार का। यही महल है दादी के अरमानों का, साकार स्वप्न ये जनक राजदुलारी का। अँधेरी राहों में रोशनी का नज़राना , जगदम्बा भवन है ज्ञान का खज़ाना ... ओ मम्मा, ओ जगदम्बा... यहाँ हर मुस्कान में ममता छिपी, हर कदम में दिव्यता की छवि। यह जगदम्बा का मंदिर महान, जहाँ आत्मा पाए अपनी पहचान। दुखों की दुनिया में प्यार का आशियाना , जगदम्बा भवन है पालना का खज़ाना... ओ मम्मा, ओ जगदम्बा... ज्ञान वीणा का अनुपम सभागार , बाबा की कुटिया में शान्ति अपार। मम्मा का कमरा मौन का आगार, जनक क्रीड़ांगन सेवा का विस्तार। माँ के हाथों लिखा अनमोल फ़साना, जगदम्बा भवन है पवित्रता का खज़ाना ... ओ मम्मा, ओ जगदम्बा... हर दिल में गूंजे दिव्य ज्ञान, हर आत्मा यहाँ भरे उड़ान। प्रकृति यहाँ बोले प्रेम का गान, हर वृक्ष कहे — “यह माँ का स्थान!” शमा पे फिदा हुआ यहाँ परवाना, जगदम्बा भवन है *समर्पण का खज़ाना... ओ मम्मा, ओ जगदम्बा... यहाँ के कमरों में बहे मम्मा की किरणें, कोहिनूर, सुखदेव, अर्जुन और आनंद के झरनें। नम्रता और दिव्यता से रूह-ए-गुलाबों को भरने, होली हंस विशाल फ़रिश्ते आए वरदान लुटाने। प्रभु प्रेम का बना दे दीवाना, जगदम्बा भवन है *दिव्यता का खज़ाना.. . मौन-क्षेत्र में मिले बाबा की पनाह, कोर्स-कक्ष में जगे ज्ञान का प्रवाह, स्टूडियो में गूँजे संगीत अथाह, दिव्य-स्टोर दिखाए पुण्य की राह, गेम-ज़ोन हटाए दुख की आह, खेतों से मिटे धरा की कराह, कुआँ सिखाए गहराई की चाह, प्रदर्शनी भी गाए “वाह-वाह!” पुण्यनगरी पूना में गूँजे मधुर तराना, जगदम्बा भवन है ममता का खज़ाना... ओ मम्मा, ओ जगदम्बा... जगदम्बा भवन है माँ का ठिकाना ... ---------------------------------------------- ----------------------------------------------