"जगमग जगमग करता निकला
जगमग जगमग करता निकला
ज्ञान सूर्य शिव प्यारा
धीरे धीरे मिटा रहा है
धीरे धीरे मिटा रहा है
अज्ञान का अंधियारा
अज्ञान का अंधियारा
जगमग जगमग करता निकला ज्ञान सूर्य शिव प्यारा
भटक रहे थे अंधकार में
भटक रहे थे अंधकार में
मिला न कोई सहारा
ब्रम्हा तन में आकर शिव ने
ब्रम्हा तन में आकर शिव ने
किया ज्ञान उजियारा
किया ज्ञान उजियारा
जगमग जगमग करता निकला ज्ञान सूर्य शिव प्यारा
ज्ञान सूर्य से प्रीत लगाकर
ज्ञान सूर्य से प्रीत लगाकर
जीवन सफल बना ले
पांच विकारों से खुद को छुड़ाकर
पांच विकारों से खुद को छुड़ाकर
दैवी जीवन बना ले
दैवी जीवन बना ले
जगमग जगमग करता निकला ज्ञान सूर्य शिव प्यारा
शिव की याद को मन में बसाकर
शिव की याद को मन में बसाकर
योग अग्नि जला ले
देह से न्यारा खुद को बनाकर
देह से न्यारा खुद को बनाकर
देही अभिमानी बना ले
देही अभिमानी बना ले
जगमग जगमग करता निकला
ज्ञान सूर्य शिव प्यारा
ज्ञान सूर्य शिव प्यारा
ज्ञान सूर्य शिव प्यारा
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