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"जैसा सोचोगे तुम, वैसा बन जाओगे जैसा कर्म होगा, वैसा फल पाओगे श्रेष्ठ कर्म का आधार है, खुद का कर लो दर्शन यही जीवन का सार है, यही जीवन का सार है जैसा सोचोगे तुम, वैसा बन जाओगे जैसा कर्म होगा, वैसा फल पाओगे मन में हो शुभ संकल्प तो, जीवन में फिर दुःख कैसा जब अंतर में शुभ भावना, तो दिल में सुख सावन जैसा हार कर जो ना हारे, जीत उसी की होती है घनघोर अंधेरे में भी जलती, जगमग उसकी ज्योति है जैसा देखोगे तुम, वैसा बन जाओगे जैसा चाहोगे तुम, वैसा बन जाओगे ये सूरज है तो है किरण,बादल है तो है पवन प्राण है तो है तन मन,सात सुरों में है सरगम जो धरती है तो है सागर, जल थल है तो है जीवन, जीवन है तो है भगवन् भगवान के संग समय करो सफल जैसा कर्म करोगे वैसा पाओगे फल (इसके साथ नैपथ्य में चलता है-- ये सूरज है तो है किरण, बादल है तो है पवन प्राण है तो है तन मन, सात सुरों में है सरगम ये सूरज है तो है किरण, बादल है तो है पवन प्राण है तो है तनमन, सात सुरों में है सरगम) जैसा सोचोगे तुम, वैसा बन जाओगे जैसा कर्म होगा, वैसा फल पाओगे श्रेष्ठ कर्म का आधार है, खुद का कर लो दर्शन यही जीवन का सार है, यही जीवन का सार है जैसा सोचोगे तुम, वैसा बन जाओगे जैसा कर्म होगा, वैसा फल पाओगे जैसा सोचोगे तुम, वैसा बन जाओगे जैसा कर्म होगा, वैसा फल पाओगे"