झिलमिल झिलमिल कर ज्योति जगे
हर रोज खुशियां प्यारी हो
खो जाए अंधेरा धरती का
एक दुनिया सब से न्यारी हो
मौसम बसंत हो हर आंगन का
सावन भी मस्त निराली हो
मरुभूमि का नामो निशान मिटे
हर कण कण में हरियाली हो
हर खुशीलेका हो रूप सजा फल फूल लदे हर डाली हो
हर बात महकता फुलो से हस्ता मुस्काता माली हो
मेरे दीप जले अंधियारा हरो
अंदर बाहर उजियारा करो
स्वर्णिम सूरज के उगने तक
इस सृष्टि का शृंगार करो
आंखो में बसा कल का सपना
विश्वास जगे जग हो अपना
शिव के हम सब प्यारे बच्चे
हम ओम शांति का मंत्र जपे
दुनिया वालो कुछ धैर्य घरों
रातों में सुबह की लाली है
तन मन के कष्ट क्लेश नहीं
वो दुनिया आनेवाली है
वो दुनिया आनेवाली है
झिलमिल झिलमिल..झिलमिल
झिलमिल झिलमिल..झिलमिल
झिलमिल झिलमिल..झिलमिल
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