तू अजन्मा तू निष्कामि
त्रिकालदर्शी सबका स्वामी
तू विदेही तू निराकार
तू करता भवसागर पार
जो तुझसे लगन लगाए वो तुझमें ही खो जाए
जो तुझसे लगन लगाए वो तुझमें ही खो जाए
जो तुझसे योग लगाए वो परमानंद को पाए
तू सत्य है तू शक्ति है
तू सत्य है तू शक्ति है
जो तुझसे लगन लगाए वो तुझमें ही खो जाए जो तुझसे योग लगाए वो परमानंद को पाए
तू सत्य है तू शक्ति है
तू सत्य है तू शक्ति है
तू प्रेम का गहरा सागर
हम सारे तेरे मोती
हम सबका तू ही रचयिता
हम सब है रचना तेरी
तू सोमनाथ तू शक्तिमान
तू देता अज्ञानी को ज्ञान
जो तुझसे लगन लगाए बिन मांगे सब पा जाए
जो तुझसे योग लगाए वो परमानंद को पाए
तू सत्य है तू शक्ति है
तू सत्य है तू शक्ति है
एकाग्र चित होके कोई
जो एक पल तेरा ध्यान धरे
मिट जाए उसके क्लेश
हो जाए इस दुनिया से परे
तू प्राणनाथ तू योगेश्वर
है तेरा घर शांति का घर
जो तुझसे लगन लगाए वो तुझमें ही खो जाए जो तुझसे योग लगाए वो परमानंद को पाए
तू सत्य है तू शक्ति है
तू सत्य है तू शक्ति है
तू सत्य है तू शक्ति है
तू सत्य है तू शक्ति है
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