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"जो तुझको जितना जानता है जो तुझको जितना जानता है वो तुझसा ही बन जाता है जो तुझको प्रभू पहचानता है जो तुझको प्रभू पहचानता है वो तेरे ही गुण गाता है जो तुझको जितना जानता है आगया शरण में जो तेरे सब छोड़कर होशियारी को आगया शरण में जो तेरे सब छोड़कर होशियारी को हो गया समर्पण तुझ पर ही हो गया समर्पण तुझ पर ही मन से त्यज दुनियादारी को जो प्रभू प्रेमधन पाता है जो प्रभू प्रेमधन पाता है कूछ पाना न रह जाता है जो तुझको जितना जानता है जिस दिल में तुम्हारी याद बसी वो दिल जैसे दिलवाला है जिस दिल में तुम्हारी याद बसी वो दिल जैसे दिलवाला है जो तन जग सेवा में अर्पित जो तन जग सेवा में अर्पित वो तन चैतन्य शिवाला है तन मन पावन हो जाता है तन मन पावन हो जाता है सुख सावन बरसाता है जो तुझको जितना जानता है हम रचना है तुम रचता हो हम जग में तू जग से बाहर हम रचना है तुम रचता हो हम जग में तू जग से बाहर सब अगम निगम का भेद खुला सब अगम निगम का भेद खुला मिला ब्रम्ह लोक से तू आकर तू जानीजानन हार प्रभु तू जानीजानन हार प्रभु वो जानी जिसे तू बताता है जो तुझको जितना जानता है जो तुझको जितना जानता है वो तुझ सा ही बन जाता है जो तुझ को प्रभू पहचानता है जो तुझ को प्रभू पहचानता है वो तेरे ही गुण गाता है "