

"ज्योतिबिंदु ज्ञान सिंधु सृष्टि पर पधारे है ज्योतिबिंदु ज्ञान सिंधु सृष्टि पर पधारे है आत्माएं धन्य हुई नेह से निहारे है आत्माएं धन्य हुई नेह से निहारे है ज्योतिबिंदु ज्ञान सिंधु सृष्टि पर पधारे है आत्म दिप को जलाके भाग्य को निखारे हम आत्म दिप को जलाके भाग्य को निखारे हम देह भान छोड़कर वारी वारी जाए हम देह भान छोड़कर वारी वारी जाए हम शूल से जो फूल करे एक ओमकार है शिव ही चित्रकार है शिव ही चित्रकार है ज्योतिबिंदु ज्ञान सिंधु सृष्टि पर पधारे है जो धरा पे शांति के लिए ही अवतरित हुआ जो धरा पे शांति के लिए ही अवतरित हुआ ब्रम्ह से उतरके इस धरापे ब्रम्हा रच दिया ब्रम्ह से उतरके इस धरापे ब्रम्हा रच दिया रुद्र यज्ञ का सृजन करता परम वो शृंगार है शिव ही चित्रकार है शिव ही चित्रकार है ज्योतिबिंदु ज्ञान सिंधु सृष्टि पर पधारे है पंच तत्व का विधाता प्रकृति को है सजाता पंच तत्व का विधाता प्रकृति को है सजाता आत्माओंको शृंगार सतयुग में ला बिठाता आत्माओंको शृंगार सतयुग में ला बिठाता दिव्य बिंदु ज्ञान सिंधु कर रहा है सावधान दृढ़ प्रतिज्ञ हो तुम खुद को करो सावधान सर्व सुख शांति का सतगुरु ओमकार है शिव ही चित्रकार है शिव ही चित्रकार है ज्योतिबिंदु ज्ञान सिंधु सृष्टि पर पधारे है मत पड़ो हदों में तुम कालचक्र आ गया मत पड़ो हदों में तुम कालचक्र आ गया सामने विनाश है धर्मराज है खड़ा सामने विनाश है धर्मराज है खड़ा अभी चलो रूहानी रूप भोलेनाथ साथ है आज का अभी करो कल नहीं वो साथ है शिव महाकालेश्वर शिव ही सृजनहार है शिव ही चित्रकार है शिव ही चित्रकार है ज्योतिबिंदु ज्ञान सिंधु सृष्टि पर पधारे है आत्माएं धन्य हुई नेह से निहारे है ज्योतिबिंदु ज्ञान सिंधु सृष्टि पर पधारे है सृष्टि पर पधारे है सृष्टि पर पधारे है"