ओम शांति है बाबा कहते हैं कि हर समय जो काम करते हो मैं तो काम करती भी मैं अपने मन का टाइम टेबल बनाकर रखो कि यह काम करते हुए [संगीत] अपने मन का समाधान क्या रहेगा है में आए कि आज अपनी भी न कर्मों के साथ और सुंदर स्वाभिमान का अभ्यास करें ऑन करो और आखिरी हफ्ते ही के बाद या संभोग के वरदानों से मेरी झोली भरते हुए कि मैं परम सौभाग्यशाली आत्मा को मैं इश्वर की संतान [संगीत] इश्वर की ग्रोथ में में कि उनकी वरदानों में पल रहा है [संगीत] में स्नान करते समय है कि मैं इस्ट दे मैं अपनी शरीर रूपी मंदिर की सफाई कर रहा हूं [संगीत] अजय को हुआ है का आईना देखते समय अभ्यास करें [संगीत] कि मैं स्वराज्य अधिकारी आत्मा [संगीत] आवाज को बिल्कुल ठीक त पर विराजमान कर दो [संगीत] को वस्त्र बदलते समय [संगीत] तो कभी फरिश्ते की चमकीली ड्रेस है तो कभी देखता है ड्रेस धारण कर लें हुआ है कि अ कि हेल्पेड समय या एक्सरसाइज करते समय कि भगवान मेरा साथी है कि मैं उनके साथ खेल रहा मैं माया अच्छी टीम विजई रही है कर दो को विजय मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है [संगीत] कर दो [संगीत] कर दो कि भोजन बनाते समय कि मैं परम पवित्र आत्मा को की पवित्रता की देवी कि बाबा के लिए भावुक बना रही हो कर दो हुआ है कि [संगीत] भोजन करते समय [संगीत] मैं बाबा की गोद में बैठा हूं [संगीत] बाबा अपने छोटे ठाकुर को मैं अपने हाथों से भोग स्वीकार कर आ रही है है वाह रे मेरा भाग्य अजय को हुआ है कि अ हुआ है ही कह चुके शरीर में है कि बाबा कर्मक्षेत्र में मेरे साथ हैं कि करण करावन हार रही है कि मैंने में तप [संगीत] कि उनकी छत्रछाया की नीति कर दो अजय को [संगीत] हुआ है भी बर्तन या कपड़े धोते हुए थे कि जैसे मैं बर्तन या कपड़े की धुलाई कर रहा हूं कर रही हैं [संगीत] है वैसे ही पर कृपा के सागर पापा [संगीत] कि वह ऊपर से पवित्र किरणों के मंच पर साथ कर रहे हैं अ कि मुझे आज मां का मैल दूर होता जा रहा है कि वे संपूर्ण पावन होती जा रही है हुआ है [संगीत] कर दो एक फोन की घंटी संकट है आप जैसी बाबा ऊपर से मुझे फोन कर रहे है और पूछ रहे हैं कि बच्चे कहां हो क्या कर रहे हो क्या मेरी याद में हो कि सरकार का वर्षा याद है है कि हर मैं बाबा की याद में मत मुझाल्दा कर दो कर दो कर दो कर दो की सीढ़ी चढ़ते उतरते समय कि मैं सारी कल का हीरो एक्टर हूं मैं कि पूरे गर्ल कि मैंने हीरो पाठ प्ले किया है हुआ है कर दो [संगीत] को सोते समय कि मैं विष्णु चतुर्भुज है कि गीता ज्ञान का सिमरन करते हुए हैं है और सारे संसार को प्रकाश देते हुए शेष शैया पर विश्राम कर रहा था अजय को कि अ [संगीत] कर दो तो प्लीज आज [संगीत] अपने भिन्न न भिन्न कर्मों में ऐसे ही और सुंदर श्यामा नऊ कि आदित्य योग के अभ्यास तुमको को शामिल करेंगे हैं ए कर्म योगी बनेंगे और योगियों तो कह तारी संसार में सुंदर वाइब्रेशंस फैलाएंगे हैं कर दो जय हो ओम शांति ओम [संगीत] कर दो [संगीत]
