खून बोल रहा,
खून खौल रहा,
देश का युवा
अब जाग रहा।
रग-रग में भारत,
दिल में तिरंगा,
आँखों में सपने,
मन निर्मल गंगा।
खून बोल रहा,
खून खौल रहा,
देश का युवा
अब जाग रहा।
न जाति की दीवार,
न धर्म का भेद,
एक देश अपना,
एकता का संदेश।
हाथों में हुनर है,
मन में विज्ञान,
मेहनत से लिखना है
भारत का नया गान।
न केवल नारों से,
न केवल बातों से,
देश बनेगा अपने
कर्मों और हाथों से।
जो गिरा—उठाएँगे,
जो रूठा—मनाएँगे,
नफ़रत की हर आग को
प्रेम से बुझाएँगे।
भ्रष्टाचार से लड़ेंगे,
सत्य को चुनेंगे,
कर्तव्य की राह पर
हर कदम बढ़ेंगे।
सीमा पर सैनिक,
खेतों में किसान,
शाला में शिक्षक,
लैब में विज्ञान।
हर हाथ की मेहनत,
हर माथे का मान,
सबसे मिलकर बनता
अपना हिन्दुस्तान।
खून बोल रहा,
खून खौल रहा,
देश का युवा
अब जाग रहा।
न आँखें झुकेंगी,
न हौसला डोलेगा,
जब युवा उठेगा,
भारत आगे बढ़ेगा।
मैं देश से पूछूँ नहीं—
मुझे क्या मिला?
मैं खुद से पूछूँ—
मैंने देश को क्या दिया?
यही मेरी मिट्टी,
यही मेरा मान,
यही मेरी धरती,
यही मेरी जान।
खून बोल रहा,
खून खौल रहा,
देश का युवा
अब जाग रहा।
भारत केवल भूमि नहीं,
भारत मेरी पहचान।
भारत केवल आज नहीं,
भारत मेरा कल, मेरा स्वाभिमान।
उठ युवा, अब वक्त तेरा,
तू ही नया सवेरा है।
तेरे कर्मों से ही लिखना
भारत का नया अध्याय है।
खून बोल रहा,
खून खौल रहा,
देश का युवा—
भारत बदल रहा!
