

कोई बेहद से इशारों में बुला रहा मुझे कोई बेहद से इशारों में बुला रहा मुझे जैसे जन्नत की बहारों में बुला रहा मुझे कोई बेहद से इशारों में बुला रहा मुझे रूप प्यारा है तो भी सबको नजर ना आता है मेरी नजरों से दूर पल भर नहीं जाता है रूप प्यारा है तो भी सबको नजर ना आता है मेरी नजरों से दूर पल भर नहीं जाता है बड़ी अदा से नजारों में बुला रहा मुझे बड़ी अदा से नजारों में बुला रहा मुझे जैसे जन्नत की बहारों में बुला रहा मुझे कोई बेहद से इशारों में बुला रहा मुझे पिता वो बाहों के झूलों में झूलाता है ममता के साए में लोरी सी वो सुनाता है पिता वो बाहों के झूलों में झूलाता है ममता के साए में लोरी सी वो सुनाता है अपने प्यारो , दुलारो में बुला रहा मुझे अपने प्यारो , दुलारो में बुला रहा मुझे जैसे जन्नत की बहारों में बुला रहा मुझे कोई बेहद से इशारों में बुला रहा मुझे रूहानी नजरों से उसने मेरा श्रृंगार किया बिठा के दिल में उसने कितना प्यार किया रूहानी नजरों से उसने मेरा श्रृंगार किया बिठा के दिल में उसने कितना प्यार किया अभी भी बाहों के हारो में बुला रहा मुझे अभी भी बाहों के हारो में बुला रहा मुझे जैसे जन्नत की बहारों में बुला रहा मुझे कोई बेहद से इशारों में बुला रहा मुझे कोई बेहद से इशारों में बुला रहा मुझे उ.. हूं...