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लगी तपस्याकी अग्नि और जली योगकी ज्वाला जीवन आंगन में शुचिता का होने लगा उजाला लगी तपस्या की अग्नि आत्म शुद्धिकी अग्नि परीक्षा की घड़ीया है अाई व्यर्थ विकल्पों की बीमारी लेने लगी बिदाई विस्मृत होने लगी पुरानी दुनिया दैहिक भान होने लगे प्रयोग योग के नित नव अनुसंधान इस तपसे ही स्वर्णिम यूगका तेज निखरनेवाला जीवन आंगन में शुचिता का होने लगा उजाला लगी तपस्या की अग्नि मन की गति पर हुआ नियंत्रण संस्कार परिशोधन शिव से कर तादात्म्य स्वयं का करते निज संशोधन चिंतन लगा चमकने चित की चंचलता कुम्हलाई निर्बलता पर निर्मलताने विजयश्री है पाई वाह तपस्या तेरा अनुभव रस भी बड़ा निराला जीवन आंगन में शुचिता का होने लगा उजाला लगी तपस्या की अग्नि अटल तपस्या यही है जिससे सारे विघ्न टलेंगे भव भय बंध मिटेंगे मै पन के सब अस्थि गलेंगे पंच तत्व परिवर्तन होंगे निज को जब बदलेंगे सूक्ष्म फरिश्ते हसते गाते प्यारे वतन चलेंगे वो देखो इस तप के बल से सतयुग आनेवाला जीवन आंगन में शुचिता का होने लगा उजाला लगी तपस्या की अग्नि –-----------------------------------