

मैं दिव्य मणि मैं दिव्य मणि मैं दिव्य मणि मैं दिव्य मणि मैं दिव्य मणि इस तन की गुफा में सदा जगमगाऊ मैं दिव्य मणि इस तन की गुफा में सदा जगमगाऊ इस तन रथ की सारथी बनकर इस तन रथ की सारथी बनकर प्रभु मिलन को जाऊ सदा जगमगाऊ सदा जगमगाऊ मैं दिव्य मणि मैं दिव्य मणि मैं दिव्य मणि मैं दिव्य मणि कितनी सुहानी घडिया है वो ज ब मैं खुद को निहारु ज्ञान की खुशबू के अंजन से जब मैं खुद को सवारु मधुर मिलन को जाऊ सदा जगमगाऊ सदा जगमगाऊ मैं दिव्य मणि मैं दिव्य मणि मैं दिव्य मणि मैं दिव्य मणि आवाज की इस दुनियासे दूर देश की वासी शांति मेरा स्वधर्म है अजर अमर अविनाशी नूर वतन को जाऊ सदा जगमगाऊ सदा जगमगाऊ मैं दिव्य मणि में दिव्य मणि में दिव्य मणि में दिव्य मणि मैं दिव्य मणि इस तन की गुफा में सदा जगमगाऊ मैं दिव्य मणि इस तन की गुफा में सदा जगमगाऊ इस तन रथ की सारथी बनकर इस तन रथ की सारथी बनकर प्रभु मिलन को जाऊ सदा जगमगाऊ सदा जगमगाऊ मैं दिव्य मणि में दिव्य मणि में दिव्य मणि में दिव्य मणि _______________________