"मैं पंछी बन कर उड़ जाऊ
नील गगन के पार
मैं पंछी बन कर उड़ जाऊ
नील गगन के पार
जहा बाबा बैठे कर रहे है मेरा इंतजार
मैं पंछी बन कर उड़ जाऊ
बाह पसारे बाबा खड़े है गले लगाने लिए
नजरो से शृंगार करेंगे नूर बनाने लिए
दिल की बाते दिल से करू
दिल की बाते दिल से करू
हो उनपर बलिहार
जहा बाबा बैठे कर रहे है मेरा इंतजार
मैं पंछी बन कर उड़ जाऊ
अव्यक्त मिलन मनाऊ मैं उनसा विदेही होकर
स्नेह सागर में समाऊ मैं तन मन को भुलाकर
उस मंजर को यूही निहारू
उस मंजर को यूही निहारू
वतन का करू दीदार
जहा बाबा बैठे कर रहे है मेरा इंतजार
मैं पंछी बन कर उड़ जाऊ
मूल वतन घर को चलूंगा बाबा के साथ में
उन जैसा फरिश्ता बनूंगा देकर हाथ हाथ में
जी भर के सिप में भर लू
जी भर के सिप में भर लू
ये मोती सा उपहार
जहा बाबा बैठे कर रहे है मेरा इंतजार
मैं पंछी बन कर उड़ जाऊ नील गगन के पार
जहा बाबा बैठे कर रहे है मेरा इंतजार
मैं पंछी बन कर उड़ जाऊ
मैं पंछी बन कर उड़ जाऊ
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