

मन में हो शुभ भाव दिल में प्यार अपार सबको देते चले प्रभु प्यार का उपहार न हो शिकवा गीला न हो कोई तकरार सबको देते चले प्रभु प्यार का उपहार क्रोध रूपी महाशत्रुपर अब विजय हम पाए जोश रोष भी इसका अंश है इसको जड़ से इसे मिटाए प्रेम की ज्योति से ज्योत जलाकर जगमगाए संसार मन में हो शुभ भाव दिल में प्यार अपार सबको देते चले प्रभु प्यार का उपहार स्नेह सागर स्नेह के मोती हम पर बरसाए परम प्रेम के हीरे जवाहर हम पर वो लुटाए पाना था वो पा लिया है और कुछ नहीं पाना बाबा से ही पाया हमने सर्व सुखोका खजाना बाबा से ही सर्व संबंध है वहीं अपना आधार ऐसा साथी फिर न मिलेगा न ऐसा दीदार मन में हो शुभ भाव दिल में प्यार अपार सबको देते चले प्रभु प्यार का उपहार क्रोध शत्रु जब सताए ये विधि अपनाए मीठा बाबा दिल से कहे तो क्रोध मुक्त हो जाए ब्राह्मण कुल की सभ्यता को हम धारण कर ले कम बोले धीरे बोले और मीठे बोल भी बोले चेहरा सदा हो मुस्कुराता यही अपना श्रृंगार देवी संस्कृति दे ये अपनी यही अपना संसार मन में हो शुभ भाव दिल में प्यार अपार सबको देते चले प्रभु प्यार का उपहार मन में हो शुभ भाव दिल में प्यार अपार सबको देते चले प्रभु प्यार का उपहार न हो शिकवा गीला न हो कोई तकरार सबको देते चले प्रभु प्यार का उपहार क्रोध रूपी महाशत्रुपर अब विजय हम पाए जोश रोष भी इसका अंश है इसको जड़ से इसे मिटाए प्रेम की ज्योति से ज्योत जलाकर जगमगाए संसार मन में हो शुभ भाव दिल में प्यार अपार सबको देते चले प्रभु प्यार का उपहार