

परमात्मा के हैं दिलतख्त नशीन हम , विश्व तख्तनशीन हम -2 कोटो में कोई हैं, कोई में कोई हम । कोई में कोई हम । परमात्मा के हैं दिलतख्त नशीन हम । भृकुटी का तख्त सब के पास ही है । बाबा का दिल तख्त मिलता हमें खास है । यही दिल तख्त ही विश्व तख्त दिलाए । स्व-राज्य ये अपना कोई छिन ना पाए । बाबा के लाडले हम , गोदी में हम ही पलते है। अतीन्द्रिय सुख के झूले में सदा ही झूलते है। संगम पर सदा रहे परमात्मा के तख्त नशीन । बेफिक्र बादशाह जैसी हो अपनी चलन ,जैसी हो अपनी चलन । परमात्मा के है दिलतख्त नशीन हम, दिलतख्त नशीन हम । बाबा से हम सब कुछ है पाये । इसके बदले में बाप समान बन जाए । याद रहे सदा अब घर है जाना । मन वचन कर्म को ब्रह्मा से मिलाना । उनके ही समान निमित्त और निर्माण । निर्मल मधुर भाषी, ना हो कोई अभिमान । ब्रह्मा के ही कदम पर रखना है हर कदम । निराकारी, निरहँकारी , निर्विकारी हो जीवन, निर्विकारी हो जीवन । परमात्मा के, दिलतख्त नशीन हम । कोटो में कोई है , कोई में कोई हम , कोई में कोई हम । परमात्मा के है, दिलतख्त नशीन हम ।