मन व्यर्थ चिंता क्यों करे शिव के कृपा अपार है
मन व्यर्थ चिंता क्यों करे शिव के कृपा अपार है
अच्छा ही होगा जो भी हो घबरानेकी क्या बात है
मन व्यर्थ चिंता क्यों करे
भूल कर देहभान को तू आत्मा पहचान ले
भूल कर देहभान को तू आत्मा पहचान ले
आनंद सुख और शांतमय वो शक्तियों की खान है
तू व्यर्थ चिंता क्यों करे
मन व्यर्थ चिंता क्यों करे शिव की कृपा अपार है
अच्छा ही होगा जो भी हो घबरानेकी क्या बात है
मन व्यर्थ चिंता क्यों करे
बाबा के सम्मुख रहो अंतकरण को सामने कर
बाबा के सम्मुख रहो अंतकरण को सामने कर
दिव्य दृष्टी की झलक ले मनको अपने मौन कर
तू व्यर्थ चिंता क्यों करे
मन व्यर्थ चिंता क्यों करे शिवकी कृपा अपार है
अच्छाही होगा जो भी हो घबरानेकी क्या बात है
मन व्यर्थ चिंता क्यों करे
योग के माध्यम से अब परमात्मा मिल जाएगा
योग के माध्यम से अब परमात्मा मिल जाएगा
शक्तिरूपी याद से जीवन कमल मुस्काएगा
तू व्यर्थ चिंता क्यों करे
मन व्यर्थ चिंता क्यों करे शिव की कृपा अपार है
अच्छा ही होगा जो भी हो घबरानेकी क्या बात है
तू व्यर्थ चिंता क्यों करे
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