"मणि से निकला एक अलौकिक प्रकाश
मणि से निकला एक अलौकिक प्रकाश
जग का हुआ एहसास विश्व परिवर्तन का समय हुआ
फूल सम खिल उठे चेहरे उदास
पाकर दादी तेरा संग मिला प्रभु का साथ
फूल सम खिल उठे चेहरे उदास
पाकर दादी तेरा संग मिला प्रभु का साथ
ज्ञानामृत पान कराके कमल सम जीना सिखाया
बन रूहे गुलाब प्रभु पर समर्पण होना सिखाया
समर्पण हो……ना सिखाया
बेला जैसी रूहानी अंत की खुशबू जगमें
दिल में सबके रहम की भावना फैलाना सिखाया
बेला जैसी रूहानी अंत की खुशबू जगमें
दिल में सबके रहम की भावना फैलाना सिखाया
ज्ञान रतन निकले मुख से बहती रहे प्यार की धारा
ऐसा उजाला दादिमा तूने ही जगमे फैलाया
तूने ही जगमे……. फैलाया
मणि से निकला एक अलौकिक प्रकाश
मणि से निकला एक अलौकिक प्रकाश
जग का हुआ एहसास विश्व परिवर्तन का समय हुआ
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