मस्तक में चमके भाग्य सितारा, और चमके भाग्य-रेखाएं।
भाग्यविधाता बाबा इन्हें देख-देख हर्षायें...
नयनों में स्नेह की रेखा , मुख में ज्ञान की रेखा
हाथों में ज्ञान-खजाने की
कदमों में पद्म पाने की
दिल में दिलाराम में लवलीन होने की रेखा
सर्व प्राप्तियां पाने का संगम युग सुहाना है,
अविनाशी बाबा से मिला अविनाशी खजाना है।
संगम की महिमा सबको सुनाना है,
बाबा से मिला अविनाशी खजाना है।
शिव के सदा जो साथ रहें, वह हम शिव-शक्तियां हैं,
मन-बुद्धि-संस्कार को अपने वश में रखती हैं।
मायाजीत, प्रकृतिजीत हम हैं स्वराज्य अधिकारी,
अब के अधिकारी ही बनें भविष्य राज्य-अधिकारी...
मनसा सेवा के द्वारा दुखियों के दुख दूर करें,
बाबा से मिली खुशियों से उनको भी भरपूर करें।
समय, संकल्प अनमोल, व्यर्थ नहीं गंवाएं,
जन्म-जन्म प्रारब्ध में इसका ही फल पाएं...
कमल-पुष्प सा खिला हुआ, हो अपना मुखड़ा,
मन जीते जग जीतने वाले हमको कैसा दुखड़ा?
तनावग्रस्त मानव को, तनाव से हम मुक्त करें,
तनाव-मुक्ति के अनुभव से उनको भी सशक्त करें...
