सच्ची शिव शक्ति बनने के लिए स्वयं को आत्मा समझकर बाबा से योग लगाना है। मन का मौन रखना है। मन का मौन अर्थात निरंतर शिव बाबा की याद। निरंतर याद का अर्थ है—"एक बाबा, दूसरा न कोई।"
मन के मौन से सूक्ष्म शक्ति मिलती है। मन का भटकना बंद करके बाबा को प्यार से, सूक्ष्म रूप से याद करना है। इससे हमें शक्ति मिलती है और हमारी कमजोरियाँ समाप्त हो जाती हैं।
कभी रोना नहीं है। हम पवित्र योगी हैं। हर परिस्थिति में बाबा की याद रहनी चाहिए। यह मन की वह स्थिति है, जिसमें बाबा के सिवा कुछ भी याद न रहे।
व्यर्थ संकल्पों को समाप्त करना है। बाबा से शक्ति लेनी है। हम सब शिव शक्तियों के अवतार हैं। बाबा की लगन में बैठना है। पवित्र बनना है। सभी बुराइयों को छोड़कर प्रेम करना सीखना है।
परिवार में शांति और प्यार से रहना है। मीठा बोलना है। बाबा से रूह-रिहान करनी है। दुआएँ लेनी हैं और दुआएँ देनी हैं। सभी को शुभ भावना और शुभकामना देनी है। बाबा को भोग लगाना है।
सच्ची शिव शक्ति स्वयं को परिवर्तन करके दूसरों के परिवर्तन का भी निमित्त बनती है। शिव शक्ति का जीवन सदा खुशी, शांति, प्रेम और शक्ति का प्रसार करने वाला होता है।
