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Homeमाया पर विजय और पुराने संस्कारों की समाप्ति कैसे करें
माया पर विजय और पुराने संस्कारों की समाप्ति कैसे करें
Spiritual Classes

माया पर विजय और पुराने संस्कारों की समाप्ति कैसे करें

Dadi Prakashmani Ji
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माया पर विजय और पुराने संस्कारों की समाप्ति कैसे करें
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माया पर विजय और पुराने संस्कारों की समाप्ति कैसे करें
Dadi Prakashmani Ji
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Essence

माया पर विजय प्राप्त कर पुराने संस्कारों का अंत करके बाप समान बनना है। बाबा की निरंतर याद में रहना है। आत्मा स्वभाव से सतोप्रधान, पवित्र और शांत है। हम ज्ञानी और योगी आत्माएँ हैं।

योग में ऐसी शक्ति है, जो पुराने संस्कारों का परिवर्तन कर देती है। बाबा की याद जितनी गहरी होगी, माया उतनी ही दूर रहेगी। पुराने संस्कारों का सूक्ष्म चिंतन भी नहीं करना है।

यह ज्ञान हमें मायाजीत और जगतजीत बनाने के लिए है। यदि जीवन में परिवर्तन नहीं है, तो ज्ञान भी अधूरा है। हम ब्राह्मण सो देवता हैं। बाबा के बने, अर्थात माया की छाया से मुक्त बने। हम स्वदर्शन चक्रधारी हैं, माया के चक्रधारी नहीं।

धारणा, श्रीमत और दैवी गुण—यही ब्राह्मण जीवन की पहचान हैं। बाबा की महिमा गाना, रूह-रिहान करना, वतन की सैर करना और हर समय बाबा की याद में रहना—यही सहज योग है।

हर पल स्वयं को चेक करें कि कौन-सा संस्कार परिवर्तन चाहता है। किसी व्यक्ति या वस्तु में आसक्ति या इच्छा रखना माया का द्वार खोल देता है।

बाबा का यज्ञ सच्चाई की नैया है। यह हिलेगी, डुलेगी, लेकिन कभी डूबेगी नहीं। अचल, अडोल, निर्विघ्न और स्थिर स्थिति ही कर्मातीत अवस्था की निशानी है।

जब बाबा साथ है, तब चिंता और भय का कोई स्थान नहीं। माफी, सहनशक्ति, नम्रता और निरहांकरिता पुराने संस्कारों को समाप्त करने की शक्तियाँ हैं।

देह-अभिमान माया का मुख्य आधार है। इसलिए देह-अभिमान, क्रोध, नफरत और अहंकार से सदा सावधान रहना है। बुद्धि होना श्रेष्ठ है, लेकिन बुद्धि का घमंड नहीं।

संगमयुग माया पर विजय पाने का श्रेष्ठ समय है। माया से डरना नहीं, बल्कि ज्ञान, योग, आत्म-अभिमान और बाबा की याद की शक्ति से उसे जीतकर बाप समान संस्कार धारण करने हैं।

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