

महक रहा है आज भी तुमसे जग का मधुबन सारा है महक रहा है आज भी तुमसे जग का मधुबन सारा है मन और मुख का मौन बखूबी एक तुमने ही धारा है मन और मुख का मौन बखूबी दादी तुमने धारा है महक रहा है आज भी तुमसे कमल पुष्प सम सदा रहीं तुम कमल पुष्प सम सदा रहीं तुम जग से न्यारी प्यारी संगम पर भी लगती थी तुम दिव्य राजकुमारी कमल पुष्प सम सदा रहीं तुम जग से न्यारी प्यारी संगम पर भी लगते थे तुम दिव्य राजकुमारी तभी तो बाबा ने भी आपपर अपना सबकुछ वारा है मन और मुख का मौन बखूबी एक तुमने ही धारा है मन और मुख का मौन बखूबी दादी तुमने धारा है महक रहा है आज भी तुमसे हे पावनता की गंगा आपका जीवन निर्विकार था हे पावनता की गंगा आपका जीवन निर्विकार था तभी सुनाया मुख से आपके शिव ने गीता सार था हे पावनता की गंगा आपका जीवन निर्विकार था तभी सुनाया मुख से आपके शिव ने गीता सार था शिव ने गीता सार था बन ब्रह्मा सी ऊंची हस्ती बन ब्रह्मा सी ऊंची हस्ती शिव को धरा पे तारा है मन और मुख का मौन बखूबी एक तुमने ही धारा है मन और मुख का मौन बखूबी दादी तुमने धारा है महक रहा है आज भी तुमसे नक्शे कदम पर आप के दादी हम भी चलेंगे प्यार से नक्शे कदम पर आप के दादी हम भी चलेंगे प्यार से बन संपूर्ण आपके जैसा जाएंगे इस संसार से नक्शे कदम पर आप के दादी हम भी चलेंगे प्यार से बन संपूर्ण आपके जैसा जाएंगे इस संसार से स्नेहांजली दादी आपको स्नेहांजली दादी आपको देता हृदय हमारा है मन और मुख का मौन बखूबी एक तुमने ही धारा है मन और मुख का मौन बखूबी दादी तुमने धारा है महक रहा है आज भी तुमसे जग का मधुबन सारा है मन और मुख का मौन बखूबी एक तुमने ही धारा है मन और मुख का मौन बखूबी दादी तुमने धारा है महक रहा है आज भी तुमसे मन का गुलशन आज भी दादी तुमसे गुल ए गुलजार है हे भागीरथ नमन हमारा आपको सौ सौ बार है आपको सौ सौ बार है