"मेंहमान हु मैं अब तो घर को है जाना
मेंहमान हु मैं अब तो घर को है जाना
यही बात हर पल अपने बुद्धि में बिठाना
मेंहमान हु मैं अब तो घर को है जाना
रात भर पंछी लेते पेड़ का सहारा
सुबह उड़ चले जाते छोड़कर बसेरा
रात भर पंछी लेते पेड़ का सहारा
सुबह उड़ चले जाते छोड़कर बसेरा
नही रोक सकता उनको कोई आशियाना
नही रोक सकता उनको कोई आशियाना
यही बात हर पल अपने बुद्धि में बिठाना
मेंहमान हु मैं अब तो घर को है जाना
मेंहमांन समझकर खुद को जहा जाओगे तुम
बिछड़ते हुए न उनसे दर्द पाओगे तुम
मेंहमांन समझकर खुद को जहा जाओगे तुम
बिछड़ते हुए न उनसे दर्द पाओगे तुम
लौकिक अलौकिक से तोड़ है निभाना
लौकिक अलौकिक से तोड़ है निभाना
यही बात हर पल अपने बुद्धि में बिठाना
मेंहमान हु मैं अब तो घर को है जाना
किसीसे कभी ना कहना लड़ते झगड़ते
दो दिन की महिमा गानी प्यार से निभाते
ऐसी प्यारी मेंहमान बनकर जीवन बिताना
ऐसी प्यारी मेंहमान बनकर जीवन बिताना
यही बात हर पल अपने बुद्धि में बिठाना
मेंहमान हु मैं अब तो घर को है जाना
घर को है जाना
घर को है जाना
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