मेरे भारतवासी जाग उठो अब सुनो प्रकृति की पुकार
अब न छेड़ो बहुत हो गया जल रहा है ये संसार
मेरे भारतवासी जाग उठो अब सुनो प्रकृति की पुकार
मेरे भारतवासी जाग उठो अब सुनो प्रकृति की पुकार
धरती मां के गोद में पलनेवाले है इंसान
ममता का जो सुख पाया भूले क्यू एहसान
धरती मां के गोद में पलनेवाले है इंसान
ममता का जो सुख पाया भूले क्यू एहसान
जंगल काटे जल ना बरसे
जंगल काटे जल ना बरसे हो गया जग वीरान
पशु पंछी के हक को छीन बन गए क्यूं हैवान
एक नहीं हजारों गाए पेड़ों को करे इतना प्यार
मेरे भारतवासी जाग उठो अब सुनो प्रकृति की पुकार
मेरे भारतवासी जाग उठो अब सुनो प्रकृति की पुकार
हो जाये जीना मुश्किल जब न खुद जाए कही
हवाएं मैली मत करो दिशा दिशा ये कह रही
हो जाये जीना मुश्किल जब न खुद जाए कही
हवाएं मैली मत करो दिशा दिशा ये कह रही
हर एक प्राणी जीते इसे सबका ये आधार
इन्हें बचाकर आओ करे सब पर उपकार
प्यारे प्रभु का सपना यहीं हैं स्वर्णिम हरियाली करें साकार
मेरे भारतवासी जाग उठो अब सुनो प्रकृति की पुकार
मेरे भारतवासी जाग उठो अब सुनो प्रकृति की पुकार
अब न छेड़ो बहुत हो गया जल रहा ये संसार
मेरे भारतवासी जाग उठो अब सुनो प्रकृति की पुकार
सुनो प्रकृति की पुकार सुनो प्रकृति की पुकार
