मौज में रहना सदा ही, उलझन में ना खो जाएँ। (२)
व्यर्थ संकल्प को सदा की बिंदी हम लगा पाएँ।
श्रीमत का हाथ पकड़कर बाबा संग घर जाएँ।
फ़िक्र सारे बाबा को दे, न रहे कोई ग़म।
बेफिक्र बादशाह तब ही बन जाएँगे हम॥
समय का, संकल्प का अनमोल है खज़ाना। (२)
संगम युग का एक पल भी व्यर्थ ना गँवाना।
एक जन्म में कई जन्मों का भाग्य है कमाना।
सफल करें तो हो सफल, अपना ये जीवन।
बेफिक्र बादशाह तब ही बन जाएँगे हम॥
आलस्य, अलबेलेपन को दे दे हम विदाई।
अचानक के पेपर की घड़ियाँ हैं आई।
कभी भी कुछ भी हो सकता है, मेरे भाई।
बाबा का है यही इशारा, रहे सावधान।
बेफिक्र बादशाह तब ही बन जाएँगे हम॥
