

"मेरे संग संग चलते हैं बाबा.... जैसे गगन में चांद चलता है चलता है उनकी किरणों की छाया में दिल हर पल रहता है जैसे गगन में चांद चलता है चलता है उनकी किरणों की छाया में दिल हर पल रहता है मेरे संग संग चलते हैं बाबा.... देखूं मैं चकोर की तरह नाचू में यूं मोर की तरह बोलूं मैं कोयल की तरह गाऊ में बुलबुल की तरह मेरा मन बहलाते हैं बाबा मेरा मन बहलाते हैं बाबा जैसे सुरो में सरगम बजता है बजता है मेरे संग संग चलते हैं बाबा.... आ.. सोचू मैं भवरो की तरह झूमु में लहरों की तरह चमकू में जुगनू की तरह मुस्काऊ में फूलों की तरह मेरी यादों में रहते हैं बाबा मेरी यादों में रहते हैं बाबा जैसे सावन में निर बरसता है बरसता है मेरे संग संग चलते हैं बाबा... मन की में हर एक बात करू एक पल भी ना मैं दूर रहू दिन रात में तो यूं ध्यान धरु बाबा से ही में प्यार करू मेरे अधरों पे मीठे बाबा मेरे अधरों पे मीठे बाबा जैसे अनहद नाद गूंजता है गूंजता है मेरे संग संग चलते हैं बाबा... मेरे संग संग चलते हैं बाबा... जैसे गगन में चांद चलता है चलता है उनकी किरणों की छाया में दिल हर पल रहता है जैसे गगन में चांद चलता है चलता है उनकी किरणों की छाया में दिल हर पल रहता है मेरे संग संग चलते हैं बाबा..."