"दादीजी साक्षात भगवान का स्वरूप थी , उनको देखकर ऐसा लगता था मानो हर पल वो ईश्वर के साथ ही रहती थी
उनके मुख पे बाबा बाबा शब्द के अनहद रहते थे
उनके चेहरे की रूहानियत से प्रतीत होता की प्रभु पिता हर पल उनके अंग संग था
और दादीजी ने अपने जीवन की दौर ईश्वर के हाथ में सौप दी थी
यही कारण था की वो सदा निश्चिंत निश्चल निमित्त निर्माण चित रही
दादीजी मुख्य प्रशासिका होते हुए भी विश्व सेवाधारी रही
उनके अटूट और ईश्वर के प्रति आस्था के कारण वो एक अमिट इतिहास रच गई
मेरी नैया तेरे हवाले है
प्रभु तु ही इसे संभाले है
मेरी नैया तेरे हवाले है
दर दर नैया तेज है धारा तो भी क्या बिगड़ेगा हमारा
दर दर नैया तेज है धारा तो भी क्या बिगड़ेगा हमारा
बाल ना बाका कर सके कोई
बाल ना बाका कर सके कोई
जिसे तुने पाला है
मेरी नैया तेरे हवाले है
प्रभुजी हम है तेरे सहारे तुम ही तो हो प्राण हमारे
प्रभुजी हम है तेरे सहारे तुम ही तो हो प्राण हमारे
मेरे आसुवन मोती की माला
मेरे आसुवन मोती की माला
अपने गले में जो डाली है
मेरी नैया तेरे हवाले है
जब से बसा तु दिल के अंदर उठ गया जगसे मन का लंगर
जब से बसा तु दिल के अंदर उठ गया जगसे मन का लंगर
तोहफा बनकर तूफ़ान अब तो लाए है मुझे किनारे पे
मेरी नैया तेरे हवाले है
मेरी नैया तेरे हवाले है
मेरी नैया तेरे हवाले है
मेरी नैया तेरे हवाले है"
