"मूलवतन से देख मसीहा आया ज्योत जलाने
मूलवतन से देख मसीहा आया ज्योत जलाने
सतयुगकी चीर ज्वाला जागी तम ये घोर जलाने
सतयुगकी चीर ज्वाला जागी तम ये घोर जलाने
मूलवतन से देख मसीहा आया ज्योत जलाने
मूलवतन से देख मसीहा आया ज्योत जलाने
कलियुगका गम तम अंधियारा
कलह भरा था जीवन
देही अभिमानी सोया था अन शैतानसा जीवन
कलियुग का गम तम अधियारा
कलह भरा था जीवन
देह अभिमानी सोया था अन शैतान सा जीवन
लाया अमृत बिंदु स्वरुपी
लाया अमृत बिंदु स्वरुपी
उत्तम ज्ञान पिलाने
उत्तम ज्ञान पिलाने
मूलवतन से देख मसीहा आया ज्योत जलाने
मूलवतन से देख मसीहा आया ज्योत जलाने
रूहानी जिस्मानी दोनों हकीकते पहचानी
इश्क का सारी भूले रहे जब ईशा किया नूरानी
रूहानी जिस्मानी दोनों हकीकते पहचानी
इश्क का सारी भूले रहे जब इश्क किया नूरानी
आया प्यारा देख मसीहा
आया प्यारा देख मसीहा
निष्कामि सीखलाने
मूलवतन से देख मसीहा आया ज्योत जलाने
मूलवतन से देख मसीहा आया ज्योत जलाने
ज्ञानी हु तो कारण भूलूं और निवारण कर दू
खुशियोकी ख़ानोसे मेरा सबका जीवन भर दू
ज्ञानी हु तो कारण भूलूं और निवारण कर दू
खुशियोकी ख़ानोसे मेरा सबका जीवन भर दू
सहज योग का अनुभव करते
ओ मसीहा…. ओ मसीहा……रे
ओ मसीहा…. रे ओ मसीहा……रे
ओ मसीहा ओ मसीहा
ज्ञानी हु तो कारण भूलूं और निवारण कर दू
खुशियोकी ख़ानोसे मेरा सबका जीवन भर दू
सहज योग का अनुभव करते
सहज योग का अनुभव करते
दीपक जल ना थाने
मूलवतन से एक मसीहा आया ज्योत जलाने
मूलवतन से एक मसीहा आया ज्योत जलाने
सतयुग चीर ज्वाला जागी तम ये घोर जलाने
सतयुग चीर ज्वाला जागी तम ये घोर जलाने
मूलवतन से देख मसीहा आया ज्योत जलाने
आया ज्योत जलाने
आया ज्योत जलाने
आया ज्योत जलाने
