BKAudioBKAudio
Menu
HomeSearchRecently Added
Your Library
For YouFavouritesHistoryMy PlaylistsOffline Downloads
Songs
PlaylistAlbumArtistsRingtones
Classes
CategoryAlbumSpeakers
Commentaries
CategorySpeakers
Music
Playlist
Avyakt
Mahavakya
Preferences
[email protected]+91 9888588815brahmakumaris.com
HomeBKOneSearchPreferences
Homeमुक्ति और जीवनमुक्ति पाने की विधि
मुक्ति और जीवनमुक्ति पाने की विधि
Spiritual Classes

मुक्ति और जीवनमुक्ति पाने की विधि

Mamma
55:1987
मुक्ति और जीवनमुक्ति पाने की विधि
Spiritual Classes
मुक्ति और जीवनमुक्ति पाने की विधि
Mamma
55:1987 plays

Essence

परमपिता परमात्मा और आत्मा, दोनों को इन आँखों से नहीं देखा जा सकता, बल्कि बुद्धि से जाना जाता है। आत्मा की पहचान परमात्मा ने कराई है। सभी आत्माएँ अभी तमोप्रधान और अपवित्र हैं। पाँच विकार ही दुःख और बंधन के कारण हैं।

परमात्मा आकर अपना परिचय देते हैं। वे अपना रूप, नाम और कर्तव्य समझाते हैं। आत्मा की तीन गतियाँ हैं—गति, सद्गति और दुर्गति।

गति अर्थात मुक्ति। आत्मा अपने निराकार स्वरूप में शांतिधाम में स्थित रहती है। वहाँ वह सुख-दुःख से न्यारी रहती है।

सद्गति अर्थात जीवनमुक्ति। दुःखों से मुक्ति तथा सदा सुख और शांति की प्राप्ति।

दुर्गति अर्थात दुःखमय अवस्था। यह उतरती कला और माया के प्रभाव का समय है। द्वापरयुग और कलियुग दुर्गति का समय हैं।

परमात्मा शिव ही मुक्ति और जीवनमुक्ति के दाता हैं। हमें देह और देह के सभी संबंधों से बुद्धि हटानी है। "अंत मति सो गति।" मन को परमात्मा में लगाना है—"मनमनाभव।"

कर्म भी श्रेष्ठ करने हैं। हमें विकारों का त्याग करना है। "कर भला तो हो भला।"

भाषा सरल रखनी है। अपने स्वभाव और व्यवहार पर ध्यान देना है। हमें सहनशीलता, धैर्य और गंभीरता अपनानी है। हमारी बोलचाल रॉयल होनी चाहिए। हमारे कारण किसी को भी दुःख नहीं पहुँचना चाहिए।

देही-अभिमानी बनना है। स्वयं को आत्मा समझकर रहना है। चार्ट रखना है, तभी आगे बढ़ सकते हैं। पुरुषार्थ करना है और संग का ध्यान रखना है। बुद्धि स्वच्छ होगी तो योग अच्छा लगेगा और ज्ञान भी अच्छी तरह समझ में आएगा। ज्ञान-स्नान करना है और प्रतिदिन मुरली सुननी है।

हमें एवर हेल्दी, एवर वेल्दी, एवर हैप्पी बनना है। हमारे कर्म श्रेष्ठ होने चाहिए। मनुष्य जन्म-मरण के बंधन में बँधा हुआ है। परमात्मा के ज्ञान और योग से ही वह मुक्ति और जीवनमुक्ति प्राप्त कर सकता है।

You might also like

1
ब्राह्मणों के कर्तव्य
ब्राह्मणों के कर्तव्य
Mamma•1K plays• 46:18
46:18
2
अलंकारधारी बनने की विधि
अलंकारधारी बनने की विधि
Mamma•708 plays• 31:00
31:00
3
Man Ki Shanti
Man Ki Shanti
Mamma•422 plays• 25:51
25:51
4
Yaad Ki Yatra-Yagya History
Yaad Ki Yatra-Yagya History
Mamma•380 plays• 37:19
37:19
5
अमृतवेला का महत्व
अमृतवेला का महत्व
Mamma•318 plays• 26:37
26:37
6
Pyari Mamma Ki Bangalore Ke Baba Ke Bachchon Ke Saath Rooh Ruhaan
Pyari Mamma Ki Bangalore Ke Baba Ke Bachchon Ke Saath Rooh Ruhaan
Mamma • Yagya History•313 plays• 20:32
20:32
7
Parmatma Ka Kartavya
Parmatma Ka Kartavya
Mamma • Parmatma Ka Gyan•222 plays• 20:08
20:08
8
कर्म, अकर्म और विकर्म का ज्ञान
कर्म, अकर्म और विकर्म का ज्ञान
Mamma • Karam Siddhant Ka Gyan•213 plays• 38:34
38:34
9
बाप, शिक्षक और सद्गुरु से वर्सा लेने की विधि
बाप, शिक्षक और सद्गुरु से वर्सा लेने की विधि
Mamma • Gurupurnima•210 plays• 25:09
25:09
10
Bap Se Varsa Lene Ki Vidhi-2
Bap Se Varsa Lene Ki Vidhi-2
Mamma•195 plays• 35:40
35:40

More From

Mamma

Speaker

Mamma