मूल्यों की गुलशन से जीवन सजा लो
बागवान बाबा को दिल में बसा लो
मूल्यों की गुलशन से जीवन सजा लो
बागवान बाबा को दिल में बसा लो
संसार की हर शै से चुनकर गुणों को
मूल्यों की माला जन जन को पहनालो
वसुधैव कुटुंबकम् की भावना जगाओ
ईर्षा और नफरत को जग से भगाओ
अनमोल जीवन से जग को हसाओ
मूल्यों की गुलशन से जीवन सजा लो
मूल्यों की गुलशन से जीवन सजा लो
बागवान बाबा को दिल में बसा लो
फूलो से पूछा तो खिलना है जीवन
तारो से पूछा तो चमकना है जीवन
सागर से पूछा समाना है जीवन
नदियों से पूछा तो बहना है जीवन
जीवन से गम के पर्दे हटालो
मूल्यों की गुलशन से जीवन सजा लो
मूल्यों की गुलशन से जीवन सजा लो
बागवान बाबा को दिल में बसा लो
सूरज से पूछा तो जलना है जीवन
आसमा से पूछा तो उड़ना है जीवन
धरती से पूछा तो सहना है जीवन
बहारो से पूछा तो बसंत है जीवन
जीवन अनुभव है सोचो विचारो
मूल्यों की गुलशन से जीवन सजा लो
मूल्यों की गुलशन से जीवन सजा लो
बागवान बाबा को दिल में बसा लो
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