मुरली तेरी सुनकर बाबा मन को मेरे चैन मिला
दिल ने जैसे मंजिल पायी और मैं खुद को भुल गया
मुरली तेरी सुनकर बाबा मन को मेरे चैन मिला
विकारो की अग्नी में जल जल कर जब
बिलकुल ही हम राख हुए
विकारो की अग्नी में जल जल कर जब
बिलकुल ही हम राख हुए
ज्ञान की थंडी छाओ मे बैठे अपने घर को याद किया
मुरली तेरी सुनकर बाबा मन को मेरे चैन मिला
काटो के जंगल मे रहते रहते
पाव मेरे जब होल हुए
काटो के जंगल मे रहते रहते
पाव मेरे जब घाव हुए
अपने को जाना बाबा को जाना
घाओ को भरना आम हुआ
मुरली तेरी सुनकर बाबा मन को मेरे चैन मिला
भुला हुआ था राही मंजिल बाबा ने आ थाम लिया
भुला हुआ था राही मंजिल बाबा ने आ थाम लिया
फूलो की ताज लाए मुझको
मनमनाभव का ज्ञान दिया
मुरली तेरी सुनकर बाबा मन को मेरे चैन मिला
मर्यादा में चलते चलते हलका पन आने लगा
मर्यादा में चलते चलते हलका पन आने लगा
ऐसा लगा के दुनिया बदली रावण राज्य बित गया
मुरली तेरी सुनकर बाबा मन को मेरे चैन मिला
मुझको न समझो तेरी बाबा लाज सदा मैं रखूंगा
मुझको न समझो तेरी बाबा लाज सदा मैं रखूंगा
है मैं सबकी सरताज जाऊं दिल ने मेरे ठान लिया
मुरली तेरी सुनकर बाबा मन को मेरे चैन मिला
दिल ने मेरे मंजिल पायी ऑर मैं खुद को भुल गया
मुरली तेरी सुनकर बाबा मन को मेरे चैन मिला
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