नष्टोमोहा बनना अर्थात अपना जीवन प्रभु के हवाले कर देना। हम शिव शक्तियाँ हैं। लौकिक संबंध अपने स्थान पर हैं, लेकिन सर्व संबंधों का आधार एक ज्ञानसागर बाबा है। वही प्रेम का सागर है, वही सद्गति देने वाला है। उसके प्यार में समाए रहना है।
नष्टोमोहा बनना सहज है। दिल का सच्चा प्यार केवल एक बाबा से हो। दिल में प्रभु को बसाना है और बुद्धि-योग बाबा से जोड़ना है। जहाँ मोह है, वहाँ दुख है; जहाँ बाबा की याद है, वहाँ सुख है।
नष्टोमोहा बनने के लिए बाप-दादा पर अटल निश्चय चाहिए। परिवार छोड़ना नहीं है, लेकिन लगाव से मुक्त रहना है। अतीन्द्रिय सुख का अनुभव करना है और "एक बाबा, दूसरा न कोई" का अभ्यास करना है।
देह-अभिमान, दिखावा, फैशन और अनावश्यक इच्छाएँ मोह को बढ़ाती हैं। "इच्छा मात्रम् अविद्या।" बाबा मिल गया, तो सब कुछ मिल गया। मोह से मुक्त बनो। मोह जीवन को बाँधता है, जबकि नष्टोमोहा जीवनमुक्त बनाता है। प्यारे भी रहना है और न्यारे भी।
स्वस्थिति मजबूत बनानी है। बाबा से प्यार और बाबा के परिवार से प्यार रखते हुए, स्वयं को आत्मा समझ अशरीरी बनने का अभ्यास करना है। सर्व से बुद्धि-योग हटाकर एक बाबा से जोड़ना है। सेवा भी करनी है, परिवार भी निभाना है, लेकिन न्यारे रहकर।
नष्टोमोहा बनने का अर्थ है परिस्थितियों में भी अडोल रहना। बंधनमुक्त, मोह-मुक्त, प्यारे और न्यारे बनना है। मन, वाणी और संकल्पों में मौन का अभ्यास कर मनसा सेवा द्वारा विश्व को शांति का दान देना है।
