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"नींद से अब जागो रे मानव नींद से अब जागो रे मानव प्रभु में मन को रमा शिव पिता आये धरा पर शिव पता आए धरा पर हो जगत परमात्मा नींद से अब जागो रे मानव प्रभु में मन को रामा हो गई है भोर कब की हो गई है भोर कब की ज्ञान का सूरज उगा ज्ञान का सूरज उगा जा रही हर श्वास विरथा जा रहे हर श्वास विरथा योग प्रभु से तू लगा नींद से अब जागो रे मानव प्रभु में मन को रमा नींद से अब जागो रे मानव प्रभु में मन को रामा फिर ना पाएगा यह अवसर फिर ना पाएगा यह अवसर कर ले अपना तू भला कर ले अपना तू भला स्वप्न से बंधन हैं झूठे स्वप्न से बंधन हैं झूठे मोह से खुद को बचा नींद से अब जागो रे मानव प्रभु में मन को रामा नींद से जागो रे मानव प्रभु में मन को रमा आत्म अभिमानी बनो और आत्म अभिमानी बनो और याद प्रभु की ना भूला याद प्रभु की ना भुला हो विदेही एक पल में हो विदेही एक पल में जा वतन फिर लौट आ नींद से अब जागो रे मानव प्रभु में मन को रमा नींद से अब जागो रे मानव प्रभु में मन को रमा"