संगम युग पर बाबा से मिले है अखुट ख़ज़ाने
संगम युग पर बाबा से मिले है अखुट ख़ज़ाने
संकल्प समय के ख़ज़ाने इसे व्यर्थ नहीं गंवाए
इसकी महिमा हम जाने अनमोल है ये ख़ज़ाने
संगम की सुहानी बेला है परमात्मा मिलन का मेला है
बाबा संग अपना जनम दिन है ये जनम अनोखा निराला है
बाबा आए है धरा पर अपनी जयंती मनाने
संगम युग पर बाबा से मिले है अखुट ख़ज़ाने
अब खतम हुई अंधियारी रात वरदानों की हो रही बरसात
त्रिकालदर्शी बन कर्म करें स्वस्थिति से रहे सदा आबाद
शुभ श्रेष्ठ संकल्पों से ख़ज़ाने है जमा कर ने
संगम युग पर बाबा से मिले है अखुट ख़ज़ाने
मै पन को अब दिल से तज ले बाबा बाबा दिल से निकले
शुभ भावना शुभ कामना इस भाव से सेवा कर ले
उत्साह हो जीवन में मन में उमंग के धरने
संगम युग पर बाबा से मिले है अखुट ख़ज़ाने
संकल्प समय के ख़ज़ाने इसे व्यर्थ नहीं गंवाए
इसकी महिमा हम जाने अनमोल है ये ख़ज़ाने
