निराकार हैं बाबा मेरे परमधाम के वासी
जिनको ढूंढे दुनियां सारी जाए मथुरा काशी
निराकार हैं बाबा मेरे परमधाम के वासी
जिनको ढूंढे दुनियां सारी जाए मथुरा काशी
कलियुग के इस घोर रात में ज्ञान का डमरू बजाते है
नया सबेरा नए जगत का सपना सच कर जाते है
रूप में बिंदु गुण में सिंधु शिव ही सबसे प्यारे है
पावन करने हमको आते सबका भाग्य जगाते है
धरती पे आके बाबा मेरे किस्मत को चमकाते
मानव को वो देव बनाते सुंदर स्वर्ग सजाते
निराकार हैं बाबा मेरे परमधाम के वासी
जिनको ढूंढे दुनियां सारी जाए मथुरा काशी
जीवन में कोई दुख हो या फिर चिंता बड़ी सताए है
शिवबाबा को याद करे जो पल में खुशियां पाए है
देह दुनियां की आस ना करना साथ ना कोई निभाए है
बाबा मेरा प्यार का सागर सब पर प्यार लुटाए है
संगम युग में आके बाबा सच्ची प्रीत सिखाए
राजयोग का पाठ पढाकर जीवन सफल बनाए
निराकार हैं बाबा मेरे परमधाम के वासी
जिनको ढूंढे दुनियां सारी जाए मथुरा काशी
निराकार हैं बाबा मेरे परमधाम के वासी
जिनको ढूंढे दुनियां सारी जाए मथुरा काशी
