निश्चय बुद्धि ही, सदा के विजयंती -2
बाबा समान अपनी हो साक्षीपन की स्थिति
निश्चय बुद्धि ही, सदा के विजयंती -2
अंतरा : 1
बाबा पर निश्चय जितना, खुद पर भी हो उतना -2
ब्राह्मण परिवार पर भी निश्चय कम ना होना
ड्रामा के इस खेल में, न हो कसर निश्चय में, खेल है अनादी
निश्चय बुद्धि ही, सदा के विजयंती -2
अंतरा : 2
स्व के निश्चय से हम, स्वमान धारी बने -2
ड्रामा के निश्चय से बदले, समस्या समाधान में
परिवार पर जो निश्चय रखें, विजयमाला में पीरों सके
बन के माला का मोती
निश्चय बुद्धि ही, सदा के विजयंती -2
अंतरा : 3
बाबा की यही है आश, खत्म करें इंतजार
माया प्रकृति दोनों भी विदाई तैयार
दुखियों के दूर करें, सुख से उन्हें भरपूर करें
तब ही मिलेगी मुक्ति
निश्चय बुद्धि ही, सदा के विजयंती -2
