बाबा साथी है, इसका अनुभव है? बाबा अभी संगम युग पर हम बच्चों के साथी बनकर हमें पार्ट प्ले करना सिखा रहे हैं। बाबा कहते हैं—बच्चे, सभी की गुण-विशेषताओं को देखकर रूहानी खुशबू फैलाओ।
सदा याद रखो—जो हम करते हैं, वही हमें रिस्पॉन्स में मिलता है। जैसे हम बाबा की महिमा करते हैं, तो बाबा उससे भी ज्यादा हम बच्चों की महिमा करते हैं।
सिर्फ मुख से बाबा-बाबा नहीं कहना है, दिल का अटूट प्यार भी होना चाहिए। अपनी स्वमान की सीट पर सदा सेट रहेंगे, तो सदा खुश रहेंगे।
बाबा कहते हैं—अगर नंबर वन में आना है, तो आ सकते हो। नंबर वन में आने के लिए विशेष रूप से इन बातों की धारणा होनी चाहिए— क्यों-क्या में नहीं आना है। जो ओटे सो अर्जुन। अपनी “घोट तो नशा चढ़े—विचार-सागर मंथन करना है और अपने विचारों को श्रेष्ठ बनाना है। जो कर्म मैं करूँगी, मुझे देखकर और भी करेंगे—ऐसा अटेंशन रखकर चलना है।
और अपने तीन रजिस्टर सदा ठीक रखने हैं— पुरुषार्थ का रजिस्टर: अगर कोई भूल की, तो रजिस्टर खराब हो जाएगा। पढ़ाई का रजिस्टर: कभी भी एब्सेंट नहीं होना है। ट्रस्टी होकर रहना है: बाबा से सदा सच्चे रहना है।
