दिल सहम गया और आंखें नम हुई
आपकी छबि आकारी जो हुई
दिल सहम गया और आंखें नम हुई
आपकी छबि आकारी जो हुई
पंछी भी कह रहे है
वो गायेंगे नहीं
बगियाकी फूल क्यारी मुस्कायेगी नहीं
सुना हुआ ये आंगन
ओ बाबा के नूरे रतन
यादें तुम्हारी मिस्री की गली
मन चाहे फिर उस गली
मिलना बिछड़ना होता है यही
यादें दिल से जाती ही नहीं
बाबा के हाथ थामे संपूर्ण हो गए
बेहद की रह दिखाकर फरिश्ता बन गए
गाए तेरे गुण धरती गगन
ओ बाबा के नूरे रतन
बाबा ने निर्वैर नाम दिया
उसको तुमने धारण किया
सेवा का जो सबुत दिया
हर दिल तुमने जीत लिया
ना मोह था किसीसे ना वैर कही
बस दिल में एक बाबा संसार वही
अब चल दिया प्यारे वतन
ओ बाबा के नूरे रतन
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