ओ दीन बंधु ओ ज्ञान सिंधु तेरी याद बिन कैसे रहु मैं
ओ दीन बंधु ओ ज्ञान सिंधु
ओ दीन बंधु ओ ज्ञान सिंधु
तेरी याद बिन कैसे रहु मैं
ओ दीन बंधु ओ ज्ञान सिंधु तेरी याद बिन कैसे रहु मैं
मुझे नजर आता कुछ नही है
ओ दीन बंधु ओ ज्ञान सिंधु तेरी याद बिन कैसे रहु मैं
तुम्हें सभी कुछ है मैने माना तेरे बिना कुछ भी है न जाना
तुम्हें सभी कुछ है मैने माना तेरे बिना कुछ भी है न जाना
तु जो नहीं तो फिर क्या करू मैं
तु जो नहीं तो फिर क्या करू मैं
तेरे बिगर भांता कुछ नही है
ओ दीन बंधु ओ ज्ञान सिंधु तेरी याद बिन कैसे रहु मैं
तु ज्ञान सागर है मैं सुखी नदिया तेरे परस बिन बीती है सदिया
तु ज्ञान सागर है मैं सुखी नदिया तेरे परस बिन बीती है सदिया
तेरी ज्ञान धारा से बहू मैं
तेरी ज्ञान धारा से बहू मैं
तेरे बिन शोभा कुछ नही है
ओ दीन बंधु ओ ज्ञान सिंधु तेरी याद बिन कैसे रहु मैं
तुम ही हो मालिक तुम ही हो पालक
मैं एक नन्हा सा तेरा बालक
तुम ही हो मालिक तुम ही हो पालक
मैं एक नन्हा सा तेरा बालक
तेरी नजर में सदा रहु मैं
तेरी नजर में सदा रहु मैं
तेरे बिन नाता कुछ नही है
ओ दीन बंधु ओ ज्ञान सिंधु तेरी याद बिन कैसे रहु मैं
तुम हो त्रिलोकी त्रिकालदर्शी प्रभु पिता मेरी एक अर्जी
तुम हो त्रिलोकी त्रिकालदर्शी प्रभु पिता मेरी एक अर्जी
सदा गीत गाए मन तेरे बस
सदा गीत गाए मन तेरे बस
तेरे बिगर भांता कुछ नही है
ओ दीन बंधु ओ ज्ञान सिंधु तेरी याद बिन कैसे रहु मैं
मुझे नजर आता कुछ नही है
मुझे नजर आता कुछ नही है
ओ दीन बंधु ओ ज्ञान सिंधु तेरी याद बिन कैसे रहु मैं
तेरी याद बिन कैसे रहु मैं
तेरी याद बिन कैसे रहु मैं
तेरी याद बिन कैसे रहु मैं
