ओ कल्पवृक्ष के बीजरूप शत शत नमन शत शत नमन
ओ सृष्टि चक्र के आदि अन्त शत शत नमन शत शत नमन
तेरी शक्ति सब में फैली है तू खुद ही एक पहेली है
तू ज्ञान का सागर रत्नागर महिमा तेरी है अनंत
शत शत नमन शत शत नमन
हर डाली तुझको याद करें हर पत्ते को आबाद करें
सब ने जीवन तुझसे पाया सबकी आशा तू भगवन
शत शत नमन शत शत नमन
हर कल्प तू कलम लगाता है हर धर्म तुझमे समाता है
तू प्रेम का सागर जादूगर खिलता तुझसे है ये चमन
शत शत नमन शत शत नमन
ओ कल्पवृक्ष के बीजरूप शत शत नमन शत शत नमन शत शत नमन
ओ सृष्टि चक्र के आदि अन्त शत शत नमन शत शत नमन
