ओ कान्हा सुना रे हमें भी बता रे ऐसी मधुरता आयी कहां से
छबि ये तुम्हारी बड़ी प्यारी प्यारी
ऐसी पावनता लाई कहां से
ओ कान्हा सुना रे
मधुबन में मुरली बजाना बुलाना गोप गोपी के रास रचाना
मनमोहना मनमोहना
सबके मन को लुभाना
ऐसी निर्मलता सीखी कहां से
ओ कान्हा सुना रे
अव्यक्त जन्मा परमधाम से आए
दिव्य रूप से ज्ञान मुरली सुनाये
स्वर्णिम जहां का मूल नारा लाए
लो तुम दिव्यता में मिली जहां से
देवों के देव सर्वेश्वर वहीं है
सबका ईश्वर परमेश्वर वहीं है
शिव है पिता और गीता है माता
वहीं है जन्मदाता मै जन्मा हूं जहांसे
हमने है जाना हमने है माना
तुम में मधुरता आयी कहां से
ओ कान्हा सुना रे हमें भी बता रे ऐसी मधुरता आयी कहां से
छबि ये तुम्हारी बड़ी प्यारी प्यारी
ऐसी पावनता लाई कहां से
ओ कान्हा सुना रे
